बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण और राहत भरा निर्णय लिया है। अब तक सरकारी स्कूलों में केवल कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को ही निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती थीं, लेकिन सरकार के नए फैसले के बाद माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के छात्र भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह निर्णय शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम माना जा रहा है।
इस फैसले से जिले के करीब डेढ़ लाख छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। जिले में कक्षा नौ से 12वीं तक अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम के अनुसार विभिन्न विषयों की पुस्तकों का पूरा सेट निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे छात्रों को समय पर किताबें मिल सकेंगी और उनकी पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
जिला शिक्षा कार्यालय के डीपीओ माध्यमिक शिक्षा विनय कुमार सुमन ने बताया कि पाठ्यपुस्तकों की छपाई का कार्य बिहार राज्य पाठ्यपुस्तक प्रकाशन निगम द्वारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया 10 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद अप्रैल माह से स्कूलों के माध्यम से पुस्तकों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा, ताकि नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से पहले ही छात्रों को सभी आवश्यक पाठ्यपुस्तकें मिल सकें। विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि किसी भी छात्र को किताबों की कमी के कारण पढ़ाई में परेशानी न हो।
शिक्षकों और अभिभावकों का मानना है कि इस निर्णय से छात्रों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। अब तक कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्रों को किताबें खुद खरीदनी पड़ती थीं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
कई बार किताबें समय पर न मिलने से पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। सरकार के इस कदम से न केवल छात्रों की पढ़ाई सुगम होगी, बल्कि सरकारी विद्यालयों में नामांकन और उपस्थिति दर में वृद्धि की भी उम्मीद जताई जा रही है।
