भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। गुरुवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीमावर्ती जिलों—पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज, सुपौल और अररिया—में सीमा प्रबंधन और विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से ‘नो मैन्स लैंड’ और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत कई जिलों में उल्लेखनीय प्रगति सामने आई है। मधुबनी जिले में चिन्हित सभी 186 अतिक्रमण पूरी तरह हटाए जा चुके हैं, जबकि किशनगंज में पिछले एक महीने के भीतर 34 अवैध कब्जों को समाप्त कर दिया गया है। पश्चिमी चम्पारण में 272 में से 261 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, और शेष मामलों में नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, चीन और अमेरिका के नागरिकों की अवैध घुसपैठ के मामलों में कार्रवाई करते हुए कई गिरफ्तारियां की हैं। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए के तहत सैकड़ों गांवों का चयन किया गया है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी।
अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर भी बड़ी सफलता मिली है। जाली नोट के खिलाफ अभियान में पूर्वी चम्पारण में 18,500 भारतीय और 25 लाख नेपाली जाली मुद्रा के साथ 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, सीतामढ़ी में 49 लाख नेपाली और 20,100 भारतीय जाली नोट बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, मधुबनी और अररिया में फर्जी पहचान पत्र और आधार कार्ड बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोहों का भंडाफोड़ करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार सीमा सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर सख्त और सक्रिय रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
