शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देने वाली स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लोन लेने वाले छात्रों पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। बिहार के शेखपुरा जिले में ऐसे 500 से अधिक छात्र-छात्राओं की पहचान की गई है, जिन्होंने लंबे समय से अपने लोन की राशि जमा नहीं की है। अब इन डिफॉल्टर छात्रों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (वित्त विभाग) से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 504 छात्र-छात्राओं को डिफॉल्टर के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें से 214 विद्यार्थियों के खिलाफ अब तक सर्टिफिकेट केस दर्ज किया जा चुका है। विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब तक लगभग 40 लाख रुपये से अधिक की वसूली भी की जा चुकी है।

अधिकारियों के अनुसार, इन सभी छात्रों पर कुल बकाया राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक है। इस बड़ी रकम की वसूली के लिए विभाग चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई कर रहा है और आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र की असिस्टेंट मैनेजर अमृता पासवान ने बताया कि कई मामलों में छात्रों को दलालों द्वारा गुमराह किया जाता है। उन्हें यह गलत जानकारी दी जाती है कि अगर नौकरी नहीं मिली तो स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लोन चुकाना जरूरी नहीं है। जबकि यह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल पढ़ाई के लिए लोन उपलब्ध कराती है, जिसमें ब्याज में कुछ छूट दी जा सकती है, लेकिन मूलधन की राशि छात्रों को हर हाल में लौटानी होती है।

विभाग ने लोन चुकाने के लिए स्पष्ट समय सीमा भी निर्धारित कर रखी है। दो लाख रुपये तक का लोन लेने वाले विद्यार्थियों को सात वर्षों के भीतर और चार लाख रुपये तक का लोन लेने वालों को दस वर्षों के भीतर किस्तों के माध्यम से राशि लौटानी होती है। इसके बावजूद कई छात्र समय पर किस्तों का भुगतान नहीं कर रहे हैं, जिससे विभाग को कड़ा रुख अपनाना पड़ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि यह योजना छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही और गलतफहमी के कारण इसका गलत उपयोग हो रहा है। यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो छात्रों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके भविष्य पर भी असर पड़ सकता है।

सर्टिफिकेट केस दर्ज होने के बाद छात्रों में हड़कंप मच गया है। कई छात्र अब जल्दबाजी में अपने बकाया की राशि जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई केवल वसूली के लिए नहीं, बल्कि अन्य छात्रों को भी जागरूक करने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि वे समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे लोन की राशि समय पर जमा करें और किसी भी तरह के भ्रम में न रहें। यदि कोई छात्र आर्थिक रूप से कठिनाई में है, तो वह विभाग से संपर्क कर समाधान निकाल सकता है, लेकिन लोन की अनदेखी करना सही नहीं है।

कुल मिलाकर, शेखपुरा में शुरू हुई यह कार्रवाई साफ संकेत दे रही है कि अब स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लिए गए लोन को हल्के में लेने वालों पर सख्ती तय है। आने वाले दिनों में और भी जिलों में इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

 

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