मधेपुरा जिले में बीती रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। अचानक बदले मौसम ने जहां जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया। फसल कटाई के ठीक पहले आई इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है।

 

जिले के मुरलीगंज, कुमारखंड, घैलाढ़ समेत कई प्रखंडों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी मकई, गेहूं और दलहन की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। कई जगहों पर फसलें जमीन पर गिरकर बिछ गईं, जबकि कई खेतों में जलजमाव के कारण फसल सड़ने लगी है। किसानों का कहना है कि इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन एक ही रात में सब कुछ तबाह हो गया।

 

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी इस आंधी-तूफान का असर देखने को मिला। कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे टूट गए और घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही। कुछ स्थानों पर कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

 

पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द फसल क्षति का आकलन कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सरकारी मदद नहीं मिली, तो उनके सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है और अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होगी।

 

स्थानीय लोगों के अनुसार, मौसम की इस मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अब उनकी उम्मीदें सरकार की राहत और मुआवजा योजना पर टिकी हैं। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन किसानों को जल्द राहत मिलने की आवश्यकता है।

 

कुल मिलाकर, मधेपुरा में आई इस आपदा ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित सरकारी सहायता की जरूरत को उजागर किया है।

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