सहरसा जिले में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस व्यापक अभ्यास में जिले के पांच अलग-अलग स्थानों पर बचाव एवं राहत कार्यों का वास्तविक समय में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों ने समन्वित तरीके से अपनी तत्परता और क्षमता का प्रदर्शन किया।

मॉक ड्रिल में जिला आपदा पदाधिकारी संजीव कुमार चौधरी, एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी रंजीत कुमार, होमगार्ड के अग्निशमन पदाधिकारी श्याम सुंदर यादव, जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित कई विभागों के वरीय अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा होमगार्ड, अग्निशमन दल, रेड क्रॉस, आपदा मित्र, एसडीआरएफ और पुलिस बल के जवानों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान का अभ्यास किया।

जिला आपदा पदाधिकारी ने बताया कि सहरसा भूकंप जोन-5 के अंतर्गत आता है, जिसे अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जिला स्कूल, ओबीसी बालिका छात्रावास, खेल भवन, सदर अस्पताल और हवाई अड्डा को मॉक ड्रिल के लिए चिन्हित किया गया था।

चयनित स्थलों पर भूकंप की काल्पनिक स्थिति उत्पन्न कर यह दिखाया गया कि आपदा की स्थिति में किस प्रकार त्वरित कार्रवाई की जाती है। टीमों ने मलबे में फंसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया।

अधिकारियों ने बताया कि किसी भी आपदा के बाद शुरुआती ‘गोल्डन ऑवर’ बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान त्वरित और समुचित सहायता मिलने पर जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

इस राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित, समन्वित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में जनहानि और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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