नवगछिया घाट स्थित ठाकुरवाड़ी में आयोजित श्री रामचरितमानस नवाह पारायण एवं श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के समापन अवसर पर पूरे पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
कथा वाचक स्वामी विनोदानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में कहा कि एक आदर्श राजा की दृष्टि में पुत्र और प्रजा दोनों समान होते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन में काम (वासना और इच्छाएं) किसी को नहीं छोड़ती, इसलिए मनुष्य को स्वयं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। यदि संभव हो तो अपने मन और विचारों को संभालकर जीवन को सही दिशा में ले जाना चाहिए।
स्वामी जी ने अपने ओजस्वी प्रवचन से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने धर्म, आचरण और मर्यादा के महत्व को विस्तार से समझाते हुए भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। कथा के दौरान भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान का स्मरण किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
कथा के समापन पर स्वामी विनोदानंद सरस्वती ने यज्ञ समिति के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को इस भव्य धार्मिक आयोजन के सफल संचालन के लिए साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं।
इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के शिव जयसवाल, बनवारी पंसारी, अशोक केडिया, अरुण यादुका, संतोष भगत, संतोष यादुका, अनिल भगत, विशाल चिरानिया, नरसिंह चिरानिया, किशन याहुका, प्रवीण भगत, अजय भगत, विनीत खेमका, कंचन खेमका, आनंद केडिया, पप्पू केडिया, शंकर चिरानिया, श्रवण केडिया, कन्हैया केडिया, आयुष खेमका, कैलाश अग्रवाल, अनिल चिरानियां सहित सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
