प्रधानमंत्री Narendra Modi से दिल्ली में मुलाकात के तुरंत बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। Eknath Shinde एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका दे दिया है। अकोला महानगरपालिका में ठाकरे गुट के 6 में से 4 पार्षदों ने शिंदे गुट की शिवसेना का दामन थाम लिया है, जिससे स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

मंगलवार को शिंदे दिल्ली दौरे पर थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब डेढ़ घंटे तक मुलाकात की। इस दौरान राज्य के राजनीतिक समीकरणों और आगामी रणनीतियों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। इस मुलाकात के तुरंत बाद शिंदे की सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के संकेत दे दिए हैं।

दिल्ली से लौटने के बाद शिंदे सीधे अपने ठाणे स्थित आवास ‘नंदनवन’ पहुंचे। रात करीब 2 बजे जब वे वहां पहुंचे, तो पहले से ही अकोला के कई नेता उनका इंतजार कर रहे थे। देर रात ‘नंदनवन’ में सियासी हलचल तेज हो गई और उसी दौरान अकोला के 4 पार्षदों ने आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की घोषणा कर दी।

शिवसेना में शामिल होने वाले पार्षदों में सुरेखा काले, मनोज पाटिल, सागर भरुका और सोनाली सरोदे का नाम शामिल है। इनमें से सुरेखा काले हाल ही में महाविकास अघाड़ी (MVA) की ओर से मेयर पद की उम्मीदवार भी रह चुकी थीं, जिन्हें वंचित बहुजन आघाड़ी का समर्थन प्राप्त था। इसके अलावा, ठाकरे गुट के जिला प्रमुख मंगेश काले ने भी शिंदे गुट का दामन थाम लिया है, जो इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।

इस सियासी घटनाक्रम के बाद Akola नगर निगम में उद्धव ठाकरे गुट की स्थिति कमजोर हो गई है। पहले जहां उनके पास 6 पार्षद थे, अब उनमें से 4 के जाने के बाद केवल 2 पार्षद ही बचे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि अकोला में ठाकरे गुट का संगठन बिखरता नजर आ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का बदलाव नहीं है, बल्कि इसका असर राज्य की व्यापक राजनीति पर भी पड़ सकता है। शिंदे गुट लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और इस तरह के दलबदल उनके लिए राजनीतिक बढ़त का संकेत हो सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, इस बड़ी टूट के बाद अब सभी की नजरें उद्धव ठाकरे और उनके नेतृत्व पर टिक गई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मातोश्री’ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है और वे अकोला में बचे हुए संगठन को कैसे संभालते हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ समय से लगातार उठापटक देखने को मिल रही है और यह घटनाक्रम उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सियासी बदलाव केवल अकोला तक सीमित रहता है या इसका असर राज्य के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलता है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद शिंदे का यह तेज एक्शन महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए मोड़ का संकेत दे रहा है, जिसने उद्धव ठाकरे गुट की चिंता बढ़ा दी है।

 

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