उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव के रहने वाले अनुपम कुमार वर्मा ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित होकर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। साधारण परिवार से निकलकर हासिल की गई उनकी यह सफलता आज पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
अनुपम कुमार वर्मा के पिता सुरेंद्र सिंह खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि उनकी मां पूनम वर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। अनुपम की शुरुआती शिक्षा बाराबंकी शहर के बाबा गुरुकुल एकेडमी से हुई, जहां से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था।
स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद अनुपम ने आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने वर्ष 2019 में स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।
सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। अनुपम ने भी इस परीक्षा के लिए कई वर्षों तक लगातार मेहनत की। वर्ष 2022 में वे सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू चरण तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन सूची में स्थान नहीं बना सके। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी।
उसी वर्ष उन्हें एक और बड़ी सफलता मिली, जब उनका चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में हो गया। इसके बाद उन्हें प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति मिली और वर्तमान में वे अयोध्या जिले की सोहावल तहसील में बीडीओ (ब्लॉक विकास अधिकारी) के पद पर कार्यरत हैं। पीसीएस अधिकारी बनने के बाद भी उन्होंने अपना बड़ा लक्ष्य नहीं छोड़ा और अंततः छठे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
अनुपम अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देते हैं। उनकी इस उपलब्धि से मुबारकपुर गांव सहित पूरे बाराबंकी जिले में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अनुपम की सफलता से गांव के युवाओं को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी।
