मखाना, जिसे ‘उजला सोना’ कहा जाता है, बिहार की पहचान बन चुका है और अब इसके विकास को नई दिशा मिलने जा रही है। सहरसा जिला, जो मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जल्द ही एक बड़े रिसर्च हब के रूप में उभरेगा।

 

केंद्र और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद सहरसा के अगवानपुर स्थित कृषि महाविद्यालय में रीजनल मखाना रिसर्च सेंटर की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत एक अलग आधुनिक भवन का निर्माण किया जाएगा, जहां मखाना पर विशेष शोध कार्य किया जाएगा।

 

बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है, जिसमें सहरसा की भूमिका सबसे अहम है। ऐसे में इस रिसर्च सेंटर की स्थापना से न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

 

इस सेंटर में लगभग 30 से 40 कृषि वैज्ञानिक मिलकर मखाना उत्पादन को लेकर एक व्यापक रोडमैप तैयार करेंगे। इसमें मखाना की उन्नत किस्मों का विकास, खेती की आधुनिक तकनीकों का विस्तार, और उत्पादन बढ़ाने के उपाय शामिल होंगे।

 

इसके अलावा, मखाना की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

 

रिसर्च सेंटर के शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हजारों युवाओं को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से सहरसा न केवल बिहार, बल्कि देशभर में मखाना उत्पादन और रिसर्च का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। यह कदम ‘उजला सोना’ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

 

कुल मिलाकर, यह परियोजना किसानों की समृद्धि, युवाओं के रोजगार और क्षेत्रीय विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

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