सहरसा जिले स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास परिसर में आज भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती बड़े श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों, छात्रावास कर्मियों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। उपस्थित अतिथियों ने कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कल्याण पदाधिकारी प्रशांत प्रियदर्शी ने अपने संबोधन में कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर का जीवन समाज के पिछड़े, अति पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर सादगी, ईमानदारी और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। उनके विचार आज भी समाज में समानता और न्याय के मार्गदर्शक हैं।

 

अनुमंडल पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग पदाधिकारी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की नीतियां और निर्णय आज भी समाज में समानता और सामाजिक न्याय स्थापित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जाए।

 

समाजसेवी सोहन झा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक नेता नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का कार्य किया। उनका जीवन उदाहरण है कि कैसे सच्ची निष्ठा और कर्तव्यपरायणता से समाज को बदलने का प्रयास किया जा सकता है।

 

इस अवसर पर वक्ताओं ने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों को अपनाएं और देश एवं समाज के विकास में योगदान दें। कार्यक्रम के दौरान छात्रों और अतिथियों ने उनके जीवन और कार्यों पर चर्चा की और उनके विचारों को जीवन में उतारने की प्रतिबद्धता जताई।

 

कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित लोगों द्वारा कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देने और उनके आदर्शों का पालन करने के संकल्प के साथ किया गया। इस अवसर पर छात्रावास के छात्र, कर्मी और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम और भी गरिमापूर्ण बन गया

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