सहरसा: सदर अस्पताल में ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर का संचालन उद्घाटन के दो माह बाद भी प्रभावी नहीं हो पाया है। 26 दिसंबर को अत्याधुनिक C-Arm मशीन का शुभारंभ किया गया था, लेकिन आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है।

 

अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऑर्थोपेडिक ओटी में जरूरी मॉनिटर और एनेस्थीसिया उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। अस्पताल में केवल एक एनेस्थेटिक डॉक्टर पदस्थापित हैं, जिन्हें जनरल ओटी, मेटरनिटी ओटी और ऑर्थो ओटी तीनों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। संसाधनों और स्टाफ की कमी से हड्डी रोग से जुड़े ऑपरेशन नियमित रूप से नहीं हो पा रहे हैं।

 

मरीजों का आरोप है कि ऑपरेशन के लिए “आज-कल” कहकर तारीख टाल दी जाती है। मजबूरी में कई मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जहां फ्रैक्चर ऑपरेशन पर 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

 

गौरतलब है कि C-Arm मशीन से मामूली से जटिल फ्रैक्चर और गोली लगने जैसे मामलों का सटीक इलाज संभव है। इसके बावजूद पिछले दो महीनों में महज पांच-छह ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन ही हो सके हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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