सहरसा नगर निगम में कथित स्ट्रीट लाइट एवं मेंटेनेंस घोटाले को लेकर पटना हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। 9 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मामले को गंभीर मानते हुए याचिका स्वीकार कर संबंधित विभाग, सहरसा की मेयर, जिला पदाधिकारी समेत करीब 12 लोगों को नोटिस जारी किया।
**रिपोर्ट:**
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग हरकत में आया और करीब 9 महीने बाद आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश जारी किया गया। इससे पहले आयुक्त, कोसी प्रमंडल के निर्देश पर तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी। इस टीम में एसडीएम निशांत कुमार, नगर निगम आयुक्त सुशील कुमार मिश्रा और सदर एसडीओ सहरसा शामिल थे। जांच टीम ने 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर 13 मई को अपनी रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को सौंप दी थी, लेकिन यह रिपोर्ट करीब नौ माह तक लंबित रही।
आरोप है कि स्ट्रीट लाइट, डेकोरेटिव लाइट और मेंटेनेंस के नाम पर प्रतिमाह लगभग 50 लाख रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद विभाग ने कार्रवाई की रफ्तार तेज की।
11 फरवरी 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नगर विकास एवं आवास विभाग ने सहरसा की मेयर, उनके निजी सचिव और निजी सचिव की पत्नी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। त्रि-स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में तीनों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विभाग ने नगर आयुक्त को तीन दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर अनुपालन प्रतिवेदन देने को कहा है। साथ ही, यदि किसी सरकारी कर्मी की संलिप्तता पाई जाती है तो एक सप्ताह के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने का निर्देश भी दिया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में आरोप है कि मेयर ने अपने निजी सचिव की पत्नी के नाम से पंजीकृत दो कंपनियों — *Aim of People* और *Narishakti Infratech & Development Pvt. Ltd.* — के माध्यम से कार्य कराए और बिना गुणवत्ता परीक्षण के राशि निकासी कराई। जांच में कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये के कथित अवैध हस्तांतरण का मामला भी सामने आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो मामला हाईकोर्ट तक नहीं पहुंचता। इस प्रकरण ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
