बिहार विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर विस्तृत चर्चा हुई। सदन ने ग्रामीण विकास विभाग के लिए 237 अरब 1 करोड़ 17 लाख 90 हजार रुपये का बजट पारित कर दिया। चर्चा के दौरान विकास योजनाओं के साथ-साथ राज्य में लागू शराबबंदी कानून पर भी तीखी बहस देखने को मिली।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि शराबबंदी एक अच्छी पहल है और समय-समय पर कानून में बदलाव भी किए गए हैं, लेकिन अब इसकी व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। जब यह मुद्दा उठाया गया, उस वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में मौजूद थे।
वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक अख्तरुल इमान ने कहा कि बिहार में केवल शराब ही नहीं, बल्कि सूखे नशे का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है, जो युवाओं के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आ रही है, इसलिए शराबबंदी की समीक्षा आवश्यक है।
हालांकि, मंत्री विजय चौधरी ने स्पष्ट कहा कि बिहार में शराबबंदी प्रभावी रूप से लागू है और इसकी समीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है। इस दौरान राजद और वाम दलों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों के नाम छूटने का मुद्दा उठाया। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार जब सरकार की ओर से जवाब दे रहे थे, तब विपक्षी सदस्यों ने जवाब से असंतुष्ट होकर सदन का बहिष्कार कर दिया।
जवाब देते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एक करोड़ 81 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है और बाकी पात्र महिलाओं को भी राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक करोड़ चार लाख 90 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 20 लाख ऑनलाइन आवेदन शामिल हैं। भारत सरकार से स्वीकृति मिलते ही लाभार्थियों के खातों में राशि भेजी जाएगी। साथ ही ‘जल जीवन हरियाली’ सहित सात निश्चय पार्ट-3 की योजनाओं को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
