बिहार में राजस्व व्यवस्था एक बार फिर ठप पड़ती नजर आ रही है। विजय कुमार सिन्हा की अपील के बावजूद अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल खत्म होती नहीं दिख रही है। बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ ने साफ कहा है कि सरकार का यह दावा पूरी तरह गलत है कि अधिकारी काम पर लौट रहे हैं।

 

संघ के महासचिव रजनीकांत और महामंत्री जितेन्द्र पांडेय ने बयान जारी कर कहा कि करीब 300 अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व अधिकारी अभी भी सामूहिक अवकाश पर हैं और किसी ने भी काम पर वापसी नहीं की है। उन्होंने दो टूक कहा कि “हड़ताल पूरी तरह जारी है और सरकार भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।”

 

दरअसल, यह हड़ताल 9 मार्च से अनिश्चितकालीन रूप से चल रही है। विवाद की मुख्य वजह डीसीएलआर यानी डिप्टी कलेक्टर लैंड रेवेन्यू पद पर बिहार प्रशासनिक सेवा (बीएएस) अधिकारियों की पोस्टिंग है। संघ का कहना है कि यह पद मूल रूप से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों का है, इसलिए इसे उसी संवर्ग में वापस बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही कैबिनेट के फैसले को वापस लेने की मांग भी की जा रही है।

 

संघ ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक पदस्थापन नियमों के अनुसार नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी और अधिकारी सामूहिक अवकाश पर बने रहेंगे।

 

वहीं दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने हड़ताली अधिकारियों से अपील की थी कि वे 24 घंटे के भीतर काम पर लौट आएं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि लौटने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और हड़ताल की अवधि को समायोजित कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार टकराव नहीं बल्कि संवाद के जरिए समाधान चाहती है।

 

लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस हड़ताल का सीधा असर राजस्व कार्यों, भूमि सर्वेक्षण और मार्च के राजस्व महाअभियान पर पड़ रहा है। आम जनता को भी जमीन से जुड़े कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बातचीत जारी है, लेकिन समाधान अभी दूर नजर आ रहा है।

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