बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं और नर्सिंग शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अब नर्सिंग संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने पटना के शास्त्री नगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया।

इस नई व्यवस्था के तहत अब नर्सिंग संस्थानों को एनओसी और मान्यता से जुड़ी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी करनी होगी। कार्यक्रम के दौरान पांच संस्थानों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। मंत्री मंगल पांडेय ने इसे बिहार के स्वास्थ्य तंत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह केवल एक पोर्टल लॉन्च नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त, संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।

उन्होंने बताया कि एक दशक पहले राज्य में नर्सिंग शिक्षा के अवसर सीमित थे, लेकिन अब एएनएम, जीएनएम, बीएससी और एमएससी नर्सिंग के कुल 656 सरकारी और निजी संस्थान संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों में 41,065 स्वीकृत सीटें उपलब्ध हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म संस्थानों की निगरानी, डेटा प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत करेगा।

मंगल पांडेय ने कहा कि इस पोर्टल के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, नए नर्सिंग कॉलेजों को आवेदन से लेकर एनओसी प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करनी होगी। दूसरा, पहले से मान्यता प्राप्त संस्थान सीट बढ़ाने या अपग्रेडेशन के लिए भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले मान्यता प्रक्रिया कागजी कार्यवाही पर आधारित थी, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता में दिक्कतें आती थीं। अब डिजिटल प्रणाली लागू होने से गुणवत्ता, पारदर्शिता और निगरानी में सुधार होगा।

सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। आने वाले समय में बिहार के नर्सिंग संस्थानों से प्रशिक्षित छात्र देश और विदेश में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे और राज्य का नाम रोशन करेंगे।

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