देहरादून से एक दिल दहला देने वाली और पूरे देश को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। त्रिपुरा के रहने वाले 26 वर्षीय अंजोल चकमा, जो देहरादून में एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे, की कुछ युवकों ने बेरहमी से चाकू मारकर हत्या कर दी। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव की एक भयावह तस्वीर पेश करती है।

 

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अंजोल चकमा के मंगोलियन जैसे चेहरे को देखकर उन्हें चीन का नागरिक समझ लिया और इस आधार पर उन पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। अंजोल ने साहसपूर्वक और स्पष्ट शब्दों में बताया कि वह भारत के त्रिपुरा राज्य का निवासी है। उन्होंने कहा कि भले ही उनका चेहरा चीन के नागरिकों से मिलता-जुलता हो, लेकिन वह उतना ही भारतीय है जितना इस देश का कोई भी नागरिक।

 

बताया जा रहा है कि अंजोल ने यह भी कहा था कि “भारत मेरे दिल में बसता है।” इसी बात से आरोपी युवक भड़क गए और गुस्से में आकर उन्होंने अंजोल पर जानलेवा हमला कर दिया। चाकू से किए गए इस हमले में अंजोल गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।

 

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक नॉर्थ ईस्ट के लोगों को उनकी पहचान, चेहरे और नस्ल के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ेगा। देश के विभिन्न हिस्सों में मंगोलियन चेहरे वाले भारतीयों को चीन या नेपाल का नागरिक समझ लेना एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है, जो नफरत और हिंसा को जन्म दे रही है।

 

इस घटना पर जीवन जागृति सोसाइटी के अध्यक्ष ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अंजोल चकमा की तस्वीर को अपने सीने से लगाकर नॉर्थ ईस्ट के लोगों को यह संदेश दिया कि पूरा भारत उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र, धर्म या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।

 

सोसाइटी की ओर से सरकार से मांग की गई है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए और उन्हें ऐसी कड़ी सजा दी जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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