भागलपुर। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “मेडल लाओ, नौकरी पाओ” खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन करें और उन्हें सरकारी नौकरी का अवसर मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इस योजना की सफलता पर सवाल खड़े कर रही है।

 

भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का स्टेडियम इन दिनों बदहाली का शिकार है। स्टेडियम का दौड़ ट्रैक पूरी तरह जर्जर हो चुका है। जगह-जगह गड्ढे हो जाने से खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा बना रहता है। कई खिलाड़ियों का कहना है कि ट्रैक की स्थिति इतनी खराब है कि दौड़ लगाना जोखिम भरा हो गया है।

 

सिर्फ ट्रैक ही नहीं, बुनियादी सुविधाओं का भी गंभीर अभाव है। स्टेडियम परिसर में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की स्थिति दयनीय है और साफ-सफाई का भी अभाव दिखता है। खासकर महिला और युवती खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 

दरोगा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की शारीरिक तैयारी के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इसी मैदान में पसीना बहाते हैं। लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करना पड़ रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि जब आधारभूत ढांचा ही मजबूत नहीं होगा, तो वे बेहतर प्रदर्शन कैसे कर पाएंगे?

 

अब खिलाड़ियों और छात्रों की निगाहें बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि मंत्री स्तर से पहल कर स्टेडियम की मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं की बहाली के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

 

सवाल यही है कि जब मैदान की स्थिति ही जर्जर हो, तो खिलाड़ी मेडल कैसे लाएंगे? अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस दिशा में कब तक ठोस कार्रवाई करती है।

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