बिहार विधानसभा के बजट सत्र में आज शराबबंदी को लेकर गरमा गरम बहस हुई। आरजेडी विधायक रणविजय साहू ने सदन में कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल हो चुका है। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि सरकार इस पर अंकुश लगाए और अवैध शराब के कारोबार पर गंभीर चर्चा करे।
विधायक रणविजय साहू ने सदन में आंकड़े पेश करते हुए कहा कि राज्य में शराब का ब्लैक मार्केट करीब 30 हजार करोड़ रुपये का फल-फूल रहा है। उन्होंने बताया कि 2016 में बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक 300 से अधिक लोगों की जान जहरीली शराब पीने से जा चुकी है। हाल ही में 18 फरवरी 2026 को रोहतास जिले में जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हुई। इसके अलावा सिवान, सारण और गोपालगंज सहित कई जिलों में नकली शराब से कई लोगों की जान गई और कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई।
रणविजय साहू ने आरोप लगाया कि उत्पाद विभाग केवल छोटे तस्करों को पकड़कर आंकड़ों की खानापूर्ति कर रहा है, जबकि बड़े सिंडिकेट बेखौफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस प्रशासनिक विफलता की सबसे बड़ी कीमत राज्य के गरीब परिवार अपनी जान देकर चुका रहे हैं।”
विधायक ने सदन में प्रस्ताव पेश किया और सरकार से आग्रह किया कि अवैध शराब के मामलों पर गंभीर चर्चा की जाए और ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अवैध शराब के कारोबार और ब्लैक मार्केट पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक आम जनता विशेषकर गरीब परिवारों के लिए खतरा बना रहेगा।
बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है और तब से कई बार संशोधन भी किए गए हैं। इसके बावजूद अवैध शराब के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। जीतन राम मांझी, प्रशांत किशोर और अन्य नेताओं ने भी पहले राजस्व के नुकसान और अवैध कारोबार को लेकर चिंता जताई है।
यह बहस साफ कर देती है कि बिहार में शराबबंदी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है और 30 हजार करोड़ के अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई की सख्त जरूरत है।
