सहरसा जिले में फाइलेरिया रोग के उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में 10 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन अभियान (एमडीए) को सफल बनाने के उद्देश्य से गुरुवार, 5 फरवरी को रेड क्रॉस सोसाइटी परिसर में मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अभियान की रूपरेखा और इसके महत्व की विस्तार से जानकारी दी।

 

इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह रोके जा सकने वाली बीमारी है। इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि 10 फरवरी से जिले के सभी प्रखंडों में लक्षित लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र व्यक्ति इस अभियान से वंचित न रह जाए।

 

सिविल सर्जन ने जानकारी दी कि लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर बूथ लगाए जाएंगे, जहां प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अपनी निगरानी में लोगों को दवा का सेवन कराएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा का सेवन स्वास्थ्यकर्मी के सामने करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी तरह की भ्रांति या लापरवाही न हो।

 

उन्होंने बताया कि अभियान के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सक्रिय रहेगा। प्रशिक्षित आशा कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर उन लाभार्थियों को दवा खिलाएंगे, जो किसी कारणवश पहले दिन दवा नहीं ले पाए होंगे। इसका उद्देश्य शत-प्रतिशत कवरेज हासिल करना है।

 

डॉ. राज नारायण प्रसाद ने यह भी स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया या अन्य सामान्य बीमारियों से पीड़ित लोग भी बिना किसी डर या झिझक के इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं। उन्होंने अफवाहों से बचने और सही जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।

 

स्वास्थ्य विभाग ने मीडिया से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जन-जागरूकता के माध्यम से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है। विभाग का लक्ष्य है कि सहरसा जिला फाइलेरिया मुक्त बनकर राज्य और देश के लिए एक मिसाल बने।

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