सहरसा से अखिल भारतीय भगैत महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवनारायण यादव राजगीर पहुंचे, जहां उन्होंने महामहिम श्री रामसहाय प्रसाद यादव, उपराष्ट्रपति नेपाल को आगामी बाबा बख्तौर अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया। यह आमंत्रण राजगीर की शांति भूमि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सहित आमंत्रित संगठन पदाधिकारियों की उपस्थिति में दिया गया।

इस अवसर पर बाबा बख्तौर अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के संस्थापक विजय कुमार को महोत्सव आयोजन की स्वीकृति मिलने की जानकारी भी दी गई। साथ ही महोत्सव से जुड़े सभी भगतगण, पुजारीगण, अनुयायी सदस्य एवं संगठन के पदाधिकारियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं।

कार्यक्रम में राजगीर तीर्थ तपोवन के पंडित संदीप पंडा ने राजगीर के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राजगीर वह पावन तपोवन है, जहां राजा वसु ब्रह्मा जी के मानस पुत्र के माध्यम से 33 करोड़ देवी-देवताओं का आगमन हुआ था। राजा वसु द्वारा यहां वाजपेयी यज्ञ संपन्न किए गए थे और इस तीर्थ नगरी की स्थापना की गई थी। राजगीर 32 कुंड, 52 धाराएं और 32 मंदिरों का अद्भुत संगम है।
उन्होंने बताया कि अधिक मास के दौरान यहां पुरुषोत्तम मास (मलमास) मेला का आयोजन होता है,

जो एक माह तक चलता है। मान्यता है कि इसी काल में राजा हिरण्यकश्यप का वध हुआ था, जिसके बाद से हिंदू पंचांग के अनुसार विशेष मास में राजगीर में भव्य मेला लगता है। इस दौरान 33 करोड़ देवी-देवताओं के यहां वास करने की धार्मिक मान्यता है।
पंडित संदीप पंडा ने यह भी बताया कि तपोवन से पाताल जल की उत्पत्ति ब्रह्मा जी द्वारा हुई थी। ऋषि-मुनियों ने सप्तऋषि कुंड का निर्माण किया था, जहां स्नान के पश्चात श्रद्धालु ब्रह्मा कुंड में प्रवेश करते हैं।
पहाड़ के कुंड का जल तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस तथा ब्रह्मा कुंड का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस बताया जाता है, जो सीधे पाताल से आता है। मान्यता है कि इन कुंडों में स्नान करने से कई प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं, इसी कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजगीर पहुंचते हैं।
इसी क्रम में बाबा बख्तौर आयोजन को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें निर्णय लिया गया कि राजगीर की धरती पर लोक धर्म, संस्कृति, लोक देवता, लोक पर्व, लोक गाथाओं और परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से एक लोक संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़ी गतिविधियां संचालित होंगी।
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि विश्व की एकमात्र प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दस्तावेज मुगल काल में जला दिए गए थे, जिनका धुआं तीन महीने तक उठता रहा था। इसी विरासत से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी के लिए लोक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया गया।
बाबा बख्तौर अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव को लेकर राजगीर में उत्साह का माहौल है और इसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।
