बिहार बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता (JE) मनोज कुमार रजक के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। मधुबनी जिले के जयनगर में तैनात रजक पर आय से असंगत संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है।
जांच में पता चला है कि 2009 में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू करने वाले रजक ने 17 वर्ष की सेवा में अपनी ज्ञात आय से 62.66 फीसदी अधिक संपत्ति जमा कर ली। EOU ने उनके दरभंगा, मधुबनी, सुपौल समेत सात ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का खुलासा हुआ।
रजक ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे प्लॉट खरीदकर कॉमर्शियल गोदाम बनवाए और उन्हें किराए पर दिया। अररिया, दरभंगा और सुपौल में आवासीय मकान और अतिरिक्त प्लॉट भी उनके नाम दर्ज हैं। सुपौल के पैतृक गांव में उनके भाई संजय रजक के नाम पर एचपी गैस डिस्ट्रीब्यूटरशिप है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्नी वीणा भारती के नाम पर रजक ने दरभंगा में पेट्रोल पंप के लिए भूमि खरीदी, जबकि नेपाल में अपने गर्लफ्रेंड के लिए एक आलीशान बंगला निर्माणाधीन कराया गया। दार्जिलिंग में भी उनके नाम चाय बागान की संपत्ति दर्ज है।
छापेमारी के दौरान 17 से अधिक भूमि दस्तावेज, वाहन, नकदी और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए। कुछ रिपोर्टों में पत्नी के बयान का हवाला देते हुए उनकी निजी जिंदगी के पहलू भी सामने आए, जिसमें नेपाल में संपत्ति बनाने और आशिक मिजाज होने का जिक्र शामिल है।
EOU की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में सरकारी अधिकारियों द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले गंभीर हैं। जांच अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे रजक की संपत्ति और धन के लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
