झारखंड के जामताड़ा में बुधवार को पेंशनरों का आक्रोश खुलकर सामने आया, जब झारखंड राज्य पेंशनर समाज की जामताड़ा शाखा ने केंद्र सरकार के खिलाफ काला दिवस मनाया। इस दौरान पेंशनरों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया और सरकार की प्रस्तावित नीति को पेंशनरों के हितों के खिलाफ बताया।
कार्यक्रम का नेतृत्व जिला सचिव चंडी दास पुरी ने किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संसद में एक ऐसा विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों पर पुराने वेतन और पेंशन से जुड़े प्रावधान लागू नहीं होंगे। इस प्रस्ताव को लेकर पेंशनरों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
चंडी दास पुरी ने आरोप लगाया कि सरकार की यह नई नीति पेंशनरों के साथ सीधा भेदभाव है। उन्होंने कहा कि एक ही विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है। इससे लाखों पेंशनरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
“सरकार की यह नीति पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि इसे तुरंत वापस लिया जाए।”
जिला सचिव ने यह भी बताया कि अखिल भारतीय राज्य पेंशनर संगठन के आह्वान पर देशभर में काला दिवस मनाया जा रहा है। इसी क्रम में जामताड़ा में भी पेंशनरों ने एकजुट होकर विरोध मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
पेंशनरों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस प्रस्ताव को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और जरूरत पड़ी तो देशव्यापी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
फिलहाल पेंशनरों का यह विरोध सरकार के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।
जामताड़ा | संतोष कुमार की रिपोर्ट
