पटना: हाईकोर्ट ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि खनन अधिकारियों द्वारा वाहनों की जब्ती की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाए। साथ ही, इस वीडियो फुटेज को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर जब्ती दस्तावेज के साथ संलग्न करना होगा और इसका उल्लेख औपचारिक जब्ती आदेश में भी करना अनिवार्य होगा।
अदालत ने राज्य सरकार और वाहन मालिकों के बीच चल रहे “चूहे-बिल्ली के खेल” पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे समाप्त करने की आवश्यकता जताई। यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें एक वाहन मालिक ने खनन विभाग द्वारा अपने ट्रक की जब्ती को चुनौती दी थी।
मामले की सुनवाई करते हुए ने कहा कि आज के तकनीकी युग में अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे वाहन को रोकने से लेकर जब्ती तक की पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग करें, जैसा कि विकसित देशों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों में कमी आएगी।
यह मामला मनोज कुमार मेहता द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिनका ट्रक 11 जनवरी 2026 को नवादा में जब्त किया गया था। याचिकाकर्ता का दावा था कि उनके पास वैध चालान मौजूद था, जबकि खनन विभाग की ओर से कहा गया कि वाहन बिना दस्तावेज के पकड़ा गया।
अदालत ने यह भी माना कि ऐसे कई मामले उसके सामने आते हैं, जहां दोनों पक्ष अलग-अलग दावे करते हैं। ऐसे में वीडियोग्राफी से सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी और अदालत में राज्य की सफलता दर भी बढ़ेगी।
कोर्ट ने अंत में कहा कि इस व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि अधिकारियों पर लगने वाले आरोपों से भी उन्हें राहत मिलेगी। साथ ही, अवैध जब्ती के मामलों में कमी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
