सैदपुर में गंगा तट पर नवनिर्मित शिव मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित भव्य रामकथा के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा व्यास स्वामी आगमानंद महाराज ने रामकथा के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह संसार एक भवसागर है, जिसमें अमंगल को किसी भी सांसारिक उपाय से मंगल में नहीं बदला जा सकता। केवल प्रभु श्रीराम का सुमिरन, चिंतन और नामस्मरण ही जीव का सच्चा कल्याण कर सकता है।
स्वामी आगमानंद महाराज ने कहा कि भगवान के नाम में अपार शक्ति है। जो व्यक्ति प्रभु के नाम का आश्रय लेता है, उसके जीवन में अमंगल का प्रवेश नहीं होता। उन्होंने कलियुग की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिससे मानव जीवन में तनाव और अशांति बढ़ रही है। ऐसे समय में प्रभु की भक्ति, सेवा और मानव कल्याण के कार्य ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।
उन्होंने मानव जीवन की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि यह जीवन बड़े पुण्य और सौभाग्य से प्राप्त होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह असहाय, निर्धन और जरूरतमंद लोगों की सहायता करे। यही सच्ची भक्ति है और यही प्रभु श्रीराम की शिक्षा भी है। रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो हमें सत्य, करुणा, सेवा और त्याग का मार्ग दिखाती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध विद्वान पंडित प्रेम शंकर भारती ने भी अपने प्रवचन से श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कारों का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे कर्म, सद्भाव और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही सच्चा धर्म है।
रामकथा के दौरान कलाकारों ने भक्ति रस से ओतप्रोत एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। “श्रीराम जय राम जय जय राम” और “राम नाम के हीरे मोती” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। भजनों और कथा के संगम से पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया।
इस धार्मिक आयोजन से सैदपुर और आसपास के क्षेत्रों का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है। दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में रामकथा का श्रवण कर रहे हैं और आयोजन को ऐतिहासिक व प्रेरणादायी बता रहे हैं।
