नरक चतुर्दशी, जिसे नरक निवारण चतुर्दशी भी कहा जाता है, के पावन अवसर पर बिहार के सहरसा जिले में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। महिषी प्रखंड स्थित प्रसिद्ध नकुलेश्वर महादेव मंदिर सहित जिले के तमाम शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अहले सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और देर शाम तक पूजा-अर्चना का सिलसिला लगातार चलता रहा।

 

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपने दिन की शुरुआत की। गंगाजल, दूध, दही, शहद, धतूरा, भांग और बेलपत्र अर्पित कर भक्तों ने महादेव से पाप मुक्ति, सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंजता रहा। भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के चलते दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नकुलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे। कई भक्तों ने व्रत रखकर विशेष पूजा-अर्चना भी की।

 

भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की गई थी। मंदिर परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, कतार व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्वयंसेवकों की तैनाती कर श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने में सहयोग किया गया। वहीं, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल भी मुस्तैद नजर आया।

 

श्रद्धालुओं का कहना है कि नकुलेश्वर महादेव में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है। हर वर्ष की तरह इस बार भी नरक चतुर्दशी पर शिवभक्तों की अपार भीड़ यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास दिन-प्रतिदिन और अधिक मजबूत होता जा रहा है।

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