नालंदा जिले के आस्थावन खंड के नेरुत पंचायत में नीलगाय और जंगली सूअरों के बढ़ते आतंक से किसान लंबे समय से थे। किसानों ने स्थानीय मुखिया से शिकायत की, जिसके बाद प्रशासन में अनियमितता आई और वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की।

असलहा, नेरुत पंचायत के किसानों ने बताया कि क्षेत्र में नीलगायों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महमदपुर खंडा, छाछू बिगहा खंडा, बलवापुर खंडा, पछियारी खंडा, गोविंदपुर खंडा, तिलोकपारी, बेलवा खंडा और चौरा पारी खंडा जैसे एशिया में 100 से 200 की संख्या में नीलगाय घूमती नजर आ रही है। ये झुंड रात और दिन में गोदाम में ज्वालामुखी विस्फोट कर रहे थे, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई थी।

किसानों की शिकायत बैठक के बाद मुखिया संघ के नतीजे और नेरुत पंचायत के मुखिया राकेश कुमार नीकी बिहारी सिंह ने वन विभाग को लिखित सूचना दी। इसके बाद वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पटना से शार्प स्टूडियो को बुलाया और प्रभावित क्षेत्र में अभियान शुरू किया।

अभियान के दौरान वन विभाग की टीम ने आस्थावां खंड के नेरुत पंचायत के अलग-अलग खंडों में 14 नीलगायों को मारने की कार्रवाई की। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में 9 नीलगायों को नियंत्रित किया जा चुका था। इस कार्रवाई के बाद किसानों को कुछ हद तक राहत मिली है और वे अपनी चोटों को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

हालांकि नीलगायों के अलावा जंगली सूअरों का आतंक भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। किसानों का कहना है कि रात के समय 20 से 25 की संख्या में वनसुअर कार्यशाला में घुसेड़ दिए जाते हैं और किसानी व राई की फसल को बर्बाद कर देते हैं। रात में हत्या की मात्रा नहीं होने का कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। किसानों का कहना है कि करीब करीब सौ एकड़ में लगी सरसों और राई की फसल को नुकसान पहुंचा है।

इस अभियान में सरकार की ओर से प्रमुख सचिव श्रेया शक्ति कुमार सिंह और मो. अफ्फान खान शामिल रहे। वहीं वन विभाग के अधिकारी श्वेता प्रियनाडार भी टीम के साथ मौजूद रहे। 14 वशाल टीम राज्य के कई सजावटी यंत्रों में इस तरह के अभियान चलाए गए हैं, जिनसे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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