सहरसा स्थित व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम जिला पदाधिकारी सहरसा और पुलिस अधीक्षक सहरसा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला के माननीय न्यायाधीशगण, न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और न्यायाधीशों ने राष्ट्रीय लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए लोगों को सुलह-समझौते के माध्यम से अपने मामलों का त्वरित और सरल निपटारा कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय पाने का एक ऐसा मंच है, जहां लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए आपसी सहमति से मामलों का समाधान किया जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से छोटे-छोटे विवादों, पारिवारिक मामलों, बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना मुआवजा, बिजली बिल और अन्य लंबित मामलों का निपटारा आसानी से किया जा सकता है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है और आम लोगों को समय पर न्याय मिल पाता है।
इस अवसर पर सहरसा पुलिस की भूमिका को भी सराहा गया। पुलिस प्रशासन न्यायिक व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आम नागरिकों को सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस और न्यायिक प्रशासन का उद्देश्य है कि लोगों को न्याय पाने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिए अलग-अलग बेंचों का गठन किया गया था, जहां न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का अवसर दिया गया।
इस दौरान लोगों को यह भी बताया गया कि लोक अदालत में लिए गए निर्णय अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ किसी भी उच्च न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। इसलिए यह मंच आपसी समझौते के जरिए विवादों को समाप्त करने का एक प्रभावी और सुलभ माध्यम है।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान कर समाज में सौहार्द और शांति बनाए रखने में सहयोग करें।
