भागलपुर: जमीन संबंधी लंबित मामलों पर डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के सख्ती का असर अब साफ दिखने लगा है। इसी क्रम में भागलपुर सदर की डीसीएलआर अपेक्षा मोदी ने फर्जी शपथपत्र के आधार पर कराए गए एक भूमि नामांतरण (म्यूटेशन) को रद्द कर दिया है। यह आदेश वाद संख्या 1767/2025-26 में पारित किया गया, जिसमें पूर्व के दाखिल-खारिज आदेश को निरस्त कर दिया गया।

मामला दाखिल-खारिज वाद संख्या 1188/2024-25 से जुड़ा है। 12 जुलाई 2024 को पारित आदेश के आधार पर मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र के गणिचक निवासी मो. इस्लाम के नाम जमाबंदी कायम की गई थी। बाद में जांच में यह तथ्य सामने आया कि शपथपत्र संख्या 3626, दिनांक 13 मई 2024 में कथित रूप से कूटरचना कर नामांतरण कराया गया। इस पूरे प्रकरण में अनुमंडल पदाधिकारी सदर विकास कुमार के निर्देश पर मो . इस्लाम के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।

जगदीशपुर अंचलाधिकारी सतीश कुमार ने 4 जनवरी को जगदीशपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद सीओ ने 16 फरवरी को स्वतः संज्ञान लेते हुए डीसीएलआर को पत्र लिखकर म्यूटेशन विखंडन की अनुशंसा की। सीओ की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आलोक में डीसीएलआर ने सुनवाई की और पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि जमीन की जमाबंदी पूर्ववत बहाल की जाए।

डीसीएलआर के इस फैसले से यह संकेत गया है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन हड़पने की कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर की गई त्वरित कार्रवाई ने भूमि सुधार विभाग की सक्रियता को भी दर्शाया है। माना जा रहा है कि लंबित जमीन विवादों और फर्जीवाड़े के मामलों में अब और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

इस कार्रवाई से जहां संबंधित क्षेत्र में हड़कंप मचा है, वहीं आम लोगों में यह संदेश गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति कूटरचित दस्तावेज के आधार पर नामांतरण कराने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय है। भूमि सुधार विभाग की इस पहल को जमीन संबंधी पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *