रमजान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत और रोजे का पवित्र समय माना जाता है, लेकिन बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव निवासी मुरली मनोहर श्रीवास्तव इस परंपरा को एक अलग ही संदेश के साथ निभा रहे हैं। खुद को कट्टर सनातनी मानने वाले मुरली मनोहर पिछले 28 वर्षों से लगातार रमजान में रोजा रख रहे हैं और समाज में भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं।
फिलहाल वे मुख्यमंत्री आवास में कार्यरत हैं, जहां व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वे पूरी निष्ठा और नियमों के साथ रोजा रखते हैं। खास बात यह है कि वे न केवल रोजा रखते हैं, बल्कि नवरात्र और छठ जैसे हिंदू पर्वों को भी पूरी श्रद्धा से मनाते हैं। उनका मानना है कि सभी धर्मों का मूल एक ही है—ईश्वर की भक्ति।
मुरली मनोहर बताते हैं कि रोजा रखने की शुरुआत एक सपने से हुई थी। उन्होंने कहा, “एक रात मैंने सपना देखा कि एक दिव्य स्वरूप मुझसे पूछ रहा है कि तुम रोजा क्यों नहीं रखते? जब मैंने यह बात अपनी मां को बताई तो उन्होंने कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है। तभी से मैंने रोजा रखना शुरू कर दिया और आज 28 साल हो गए।”
परिवार की ओर से उन्हें कभी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, हालांकि बाहर के लोग कभी-कभी टिप्पणी करते हैं। लेकिन वे इन बातों पर ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि इबादत के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं होती।
मुरली मनोहर एक लेखक भी हैं और उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, वीर कुंवर सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर किताबें लिखी हैं। इसके अलावा वे कुरान का भोजपुरी में अनुवाद भी कर रहे हैं। उनकी सभी रचनाओं का मुख्य उद्देश्य गंगा-जमुनी संस्कृति को बढ़ावा देना है।
वे कहते हैं, “चाहे रोजा रखें या पूजा करें, अगर मन साफ है तो हर इबादत स्वीकार होती है।”
