(FAO) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन के मुताबिक, यदि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और संघर्ष 40 दिनों से अधिक समय तक चलता है, तो दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब लगातार दूसरे महीने वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक में वृद्धि दर्ज की गई है।
FAO के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में खाद्य मूल्य सूचकांक औसतन 128.5 अंक रहा, जो फरवरी के मुकाबले 2.4 प्रतिशत अधिक है। वहीं, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह लगभग 1 प्रतिशत ज्यादा है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है, जो मिडल ईस्ट संकट के कारण बढ़ी है।
FAO के मुख्य अर्थशास्त्री ने बताया कि फिलहाल अनाज का वैश्विक भंडार पर्याप्त होने से कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा है। लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो 40 दिनों के बाद हालात बिगड़ सकते हैं। इससे खेती की लागत, उर्वरकों की उपलब्धता और परिवहन पर सीधा असर पड़ेगा, जिसका प्रभाव 2026 ही नहीं बल्कि 2027 तक देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में चीनी की कीमतों में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, क्योंकि ब्राजील में गन्ने का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में ज्यादा किया जा रहा है। वहीं, वनस्पति तेल की कीमतें 5.1 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि अमेरिका में सूखे और ऑस्ट्रेलिया में उर्वरक संकट की आशंका से गेहूं के दाम 4.3 प्रतिशत तक बढ़ गए।
FAO का अनुमान है कि इस साल वैश्विक गेहूं उत्पादन 820 मिलियन टन रह सकता है, जो पिछले साल से 1.7 प्रतिशत कम है। यदि हालात नहीं सुधरे, तो बढ़ती लागत गरीब और विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
