भागलपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां दवाओं के सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। World Health Organization यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों की अनदेखी बिहार में मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दवाओं को 15°C से 25°C के नियंत्रित तापमान, अधिकतम 30°C तक, सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य है। लेकिन बिहार के कई हिस्सों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। भागलपुर जिले के पीरपैंती क्षेत्र से पूर्व बीजेपी विधायक Lalan Paswan ने इस मुद्दे को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
ललन पासवान ने कहा कि सरकारी अस्पतालों और दवा भंडारण केंद्रों में न तो तापमान नियंत्रण की समुचित व्यवस्था है और न ही मॉनिटरिंग या लॉग बुक का सही रखरखाव किया जा रहा है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति मरीजों की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में बिहार विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे को उठाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति में सुधार नहीं होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
इतना ही नहीं, ललन पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका यानी पीआईएल दायर करेंगे।
स्पष्ट है कि दवाओं के भंडारण में लापरवाही सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।
