भागलपुर में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एमडीए अभियान को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मॉडल अस्पताल सभागार में एक महत्वपूर्ण मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सा विशेषज्ञों तथा विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और एमडीए अभियान को सफल बनाने में मीडिया की भूमिका को सशक्त करना रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि फाइलेरिया एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह स्थायी विकलांगता का कारण बन सकता है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि सरकार द्वारा संचालित एमडीए अभियान के तहत लोगों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन दवाओं का उद्देश्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और बीमारी के प्रसार को रोकना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में ही वितरित की जाती हैं।
मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की गई कि वे इस अभियान से जुड़ी सटीक और सकारात्मक जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या भय की स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही नागरिकों से भी अनुरोध किया गया कि वे स्वयं दवा का सेवन करें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), पिरामल स्वास्थ्य, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज, LEPRA और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च जैसी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी रही। प्रतिनिधियों ने फाइलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्यों और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। सामूहिक सहयोग से ही इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

