लातेहार में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन जेजेएमपी के सब-जोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा उर्फ टाइगर जी उर्फ विनोद लोहरा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह सरेंडर लातेहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां उसने आईजी पलामू प्रक्षेत्र शैलेंद्र कुमार सिन्हा, एसपी कुमार गौरव और सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के कमांडेंट यादराम बुनकर के समक्ष हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

 

आत्मसमर्पण के बाद आईजी ने सुरेंद्र लोहरा को माला पहनाकर और बुके देकर स्वागत किया। साथ ही सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत उसे पांच लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक भी सौंपा गया। इस मौके पर आईजी ने इस सफलता के लिए एसपी और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम को बधाई दी और कहा कि बेहतर समन्वय और रणनीति के कारण यह संभव हो पाया है।

 

आईजी ने सुरेंद्र लोहरा के परिवार, खासकर उसकी पत्नी की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने उसे आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय अन्य उग्रवादियों और नक्सलियों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और शांतिपूर्ण जीवन जिएं।

 

जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र लोहरा पिछले करीब 20 वर्षों से माओवादी और जेजेएमपी संगठन से जुड़ा रहा है। इस दौरान वह कई आपराधिक घटनाओं में शामिल रहा। उसके खिलाफ लातेहार, चंदवा और हेरहंज थानों में कुल आठ गंभीर मामले दर्ज हैं।

 

आईजी ने बताया कि वर्ष 2025 में भी 23 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि 2026 में अब तक कई बड़े उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिसमें गिरफ्तारी और सरेंडर दोनों शामिल हैं।

 

खुद सुरेंद्र लोहरा ने कहा कि वह सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौट रहा है और अब शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहता है।

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