सहरसा जिले के रूपनगर वार्ड नंबर 45 में एक बार फिर जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि विवाद लंबे समय से चल रहा था, लेकिन अब यह खूनी संघर्ष में बदल गया है।

 

पीड़ित मोहम्मद शोएब के अनुसार, उन्होंने साल 2024 में 10 कट्ठा जमीन खरीदी थी। लेकिन साल 2025 में मोहम्मद मुनाजिर और उनके पिता नईम ने उस जमीन में से 5 कट्ठा पर अपना दावा करना शुरू कर दिया। इसको लेकर पहले से ही थाना में मामला दर्ज है और विवाद लगातार जारी था।

 

इसी जमीन पर मोहम्मद शोएब के पाटीदार मोहम्मद शमशुद और उनके परिवार ने गेहूं की खेती की थी। आरोप है कि दो दिन पहले मोहम्मद मुनाजिर और उनके पिता नईम ने रात के अंधेरे में 5 कट्ठा में लगी गेहूं की फसल काट ली। जब इसकी सूचना पुलिस को दी गई, तो पीड़ित का आरोप है कि केस के आईओ ने उल्टा उन्हीं पर शक जताया और कहा कि गेहूं उन्होंने ही काटा है, जबकि उनका घर खेत से करीब 40 किलोमीटर दूर है।

 

घटना ने अगले दिन और गंभीर रूप ले लिया। जब मोहम्मद शमशुद के परिवार के लोग बचे हुए गेहूं की कटाई कर रहे थे, तभी मोहम्मद मुनाजिर और उनके पिता नईम कई लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और मारपीट शुरू कर दी। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि जान बचाने के लिए मोहम्मद शमशुद को पास के एक मस्जिद में शरण लेनी पड़ी।

 

इस दौरान हुई मारपीट में मोहम्मद शोएब के दोनों पाटीदार गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह पूरी घटना पुलिस के सामने हुई, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक जमीन विवाद इस तरह हिंसक रूप लेते रहेंगे, और प्रशासन कब जागेगा?

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