जामताड़ा जिले के नाला क्षेत्र में सोमवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां भव्य कलश यात्रा के साथ श्री श्री 1008 लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा इलाका भक्ति के रंग में रंग गया।

महायज्ञ की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें 1001 कुंवारी कन्याओं ने सिर पर कलश धारण कर हिस्सा लिया। यह दृश्य श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत उदाहरण बन गया। कलश यात्रा की शुरुआत कुरुली नदी के तट से की गई, जहां बनारस से आए विद्वान पंडित परमात्मा पांडे ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करवाई। श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में पवित्र जल भरा।

 

इसके बाद ढोल-नगाड़ों, शंख ध्वनि और भक्ति गीतों के साथ शोभायात्रा यज्ञ स्थल के लिए रवाना हुई। पूरे मार्ग में “जय श्री राम”, “हर हर महादेव” और “हरि नाम” के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। जगह-जगह स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया।

 

यज्ञ स्थल पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और हवन के साथ महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस भव्य धार्मिक आयोजन का नेतृत्व आयोजक राधु मंडल द्वारा किया जा रहा है, जिनके निर्देशन में कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया है।

 

आयोजन समिति के अनुसार, यह महायज्ञ लगातार 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन हवन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। साथ ही 7 दिवसीय भागवत कथा का भी आयोजन किया गया है, जिसमें वृंदावन से आईं कथावाचिका राधा किशोरी जी प्रतिदिन शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगी।

 

कुल मिलाकर, नाला में चल रहा यह महायज्ञ क्षेत्र में भक्ति, संस्कृति और एकता का संदेश दे रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

रिपोर्ट: संतोष कुमार

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