बिहार के सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत मोहतनपुर पंचायत की रहने वाली पूजा देवी की कहानी आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कभी आर्थिक तंगी और पारिवारिक परेशानियों से जूझने वाली पूजा देवी ने जीविका से जुड़कर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि अपने पूरे परिवार की तकदीर भी संवार दी।

 

पूजा देवी ‘राधिका स्वयं सहायता समूह’ की सक्रिय सदस्य हैं, जो ‘मिनट ग्राम संगठन’ के अंतर्गत संचालित होता है। एक साधारण ग्रामीण महिला के रूप में उनका जीवन पहले संघर्षों से भरा हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता था।

 

पूजा देवी के चार बच्चे हैं। उनके पति पप्पू कुमार दास पहले गांव में चप्पल-जूते की छोटी सी दुकान चलाते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेते थे। नशे की आदत के कारण घर का माहौल अक्सर तनावपूर्ण रहता था और आर्थिक स्थिति भी लगातार खराब होती जा रही थी। ऐसे माहौल में बच्चों की पढ़ाई और परिवार का भविष्य असुरक्षित नजर आता था।

 

करीब चार साल पहले पूजा देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उनके अंदर आत्मविश्वास का संचार हुआ। उन्होंने अपने पति को समझाकर नशे की आदत छोड़ने के लिए प्रेरित किया और खुद भी उनके काम में सहयोग करना शुरू कर दिया। पूजा देवी इंटरमीडिएट तक पढ़ी हुई हैं, इसी वजह से उन्हें ‘जीविका मित्र’ के रूप में काम करने का अवसर भी मिला।

 

जीविका मित्र के रूप में काम करते हुए उन्हें कई तरह के प्रशिक्षण और नई जानकारियां मिलीं, जिससे उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में काफी वृद्धि हुई। इसका सकारात्मक असर उनके परिवार पर भी पड़ा। उनके पति अब पूरी लगन और जिम्मेदारी के साथ दुकान का काम संभाल रहे हैं और परिवार की जिम्मेदारियां भी ईमानदारी से निभा रहे हैं।

 

पूजा देवी ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कई बार ऋण लेकर दुकान में पूंजी का निवेश किया, जिससे कारोबार धीरे-धीरे बेहतर होता चला गया। आज उनका परिवार आर्थिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है। उनके सभी बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार में खुशहाली का माहौल है।

 

आज पूजा देवी की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने गांव की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि समाज को भी नई दिशा दे सकती हैं।

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