भागलपुर:कहते हैं कि अगर माता-पिता का साथ और सही मार्गदर्शन मिले, तो बच्चे कम उम्र में भी बड़े सपने साकार कर सकते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है भागलपुर से, जहां मात्र 13 वर्ष की उम्र में देवांश गहलोत ने अपनी पहली पुस्तक लिखकर एक नई मिसाल कायम कर दी है।

खास बात यह है कि इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनकी मां की प्रेरणा का रहा है।देवांश गहलोत ने अपनी किताब “Teenhood: A Tempting Disaster” को अपनी मां से मिली प्रेरणा के बल पर लिखा है।

उन्होंने बताया कि जब वे कक्षा 6 में थे, तभी से इस पुस्तक पर काम करना शुरू कर दिया था। लगातार मेहनत और लगन के बाद आज उनकी किताब प्रकाशित हो चुकी है, जिससे वे बेहद खुश और उत्साहित हैं।देवांश ने बताया कि उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक रहा है। उन्होंने कक्षा 3 से ही कविता और कहानियां लिखनी शुरू कर दी थी। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया और उन्होंने एक पूरी किताब लिख डाली। इस पुस्तक की खास बात यह है कि इसके कवर पेज डिजाइन से लेकर कंटेंट और हेडिंग तक, हर चीज खुद देवांश ने तैयार की है।देवांश का सपना है कि वे आगे चलकर एक न्यूरोसर्जन डॉक्टर बनें।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने लेखन के जुनून को कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए उस विषय की गहराई से पढ़ाई और समझ जरूरी है। तभी व्यक्ति आगे बढ़ सकता है और बेहतर कर सकता है।

देवांश की मां रूपाली, जो एक गृहिणी हैं, ने बताया कि उन्होंने शुरू से ही अपने बेटे की प्रतिभा को पहचाना और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वे हमेशा देवांश को इंग्लिश लिटरेचर पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करती रहीं। आज अपने बेटे की इस उपलब्धि पर उन्हें बेहद गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के प्रकाशन में परिवार ने साथ दिया, लेकिन इसकी पूरी मेहनत और क्रिएटिविटी देवांश की ही है।वहीं, देवांश के पिता, जो एक सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक हैं, ने भी अपने बेटे की इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने बताया कि देवांश बचपन से ही लिखने का शौकीन रहा है और लगातार बेहतर करता गया है। परिवार ने हमेशा उसका साथ दिया और आज उसकी मेहनत का परिणाम सबके सामने है।

भागलपुर के इस होनहार बेटे ने यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। सही दिशा, मेहनत और मां की प्रेरणा से कोई भी बच्चा बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। देवांश गहलोत आज उन सभी बच्चों और युवाओं के लिए एक मिसाल बन गए हैं, जो अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।

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