कहा जाता है एक शिक्षक विद्यार्थी के जीवन की वह ज्योति है जो उसके आगामी जीवन के पथ का निर्धारण करती है. यह बात हर युग में हर परिपेक्ष में सत्य सिद्ध हुई है और हमेशा सत्य रहेगी. इस बात का पुख्ता उदाहरण है मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में तैनात सब इंस्पेक्टर बखत सिंह. जिन्होंने पूरे गांव से अशिक्षा दूर भगाने का संकल्प लिया है. सिंह वर्तमान में मध्यप्रदेश के जिला पन्ना के बज्र पुर गांव में SI के पद पर तैनात है.

बखत सिंह वर्तमान में मध्यप्रदेश के जिला पन्ना के बज्र पुर गांव में SI के पद पर तैनात है. बखत सिंह इससे पहले सरकारी शिक्षक थे. अब वह शिक्षक से सब इंस्पेक्टर बन चुके हैं लेकिन उनकी पढ़ाने की आदत नहीं छूटी.

वह अब थाना परिसर में ही सभी बच्चों को पढ़ाते हैं. बखत सिंह मुख्य रूप से उन बच्चों को पढ़ाते हैं जो दलित, आदिवासी और मजदूर परिवारों से तालुकात रखते हैं. इन सभी बच्चों को बखत सिंह ने शिक्षित करने का जिम्मा उठाया है.

कुल 6000 आबादी वाले इस गांव में जरूरतमंद सभी बच्चों को बखत सिंह स्वयं पढ़ाते हैं इसके लिए वह हर सुबह ड्यूटी से पहले सुबह 7:00 बजे से 10:00 बजे तक क्लास लगाते हैं. सभी बच्चों को पढ़ाने के बाद ही वह अपनी ड्यूटी पर तैनाती बरतते हैं. केवल इतना ही नहीं इन गरीब बच्चों के लिए बखत सिंह ने पुस्तकालय की भी स्थापना की है जहां से जरूरतमंद सभी बच्चे पुस्तके पढ़ सकते हैं.

ऐसा सराहनीय कदम उठाकर बखत सिंह ने पूरे पुलिस प्रशासन की एक अच्छी छवि पेश की है, एक मिसाल पेश की है कि यदि इंसान समाज में भलाई करना चाहे तो वह किसी भी प्रकार से इसे पूरा कर सकता है.

स्पष्ट है विद्या दान महादान है, विद्या बांटने से बढ़ती है लेकिन आजकल के शिक्षकों पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार है. उन सभी की सोच पर बखत सिंह का यह कदम कटाक्ष है और एक सीख है कि समाज में हर व्यक्ति को शिक्षा पाने का अधिकार है.

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