**शिक्षा एवं छात्रवृत्ति के लिए जागरूकता रैली का सफल आयोजन**
उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय इंग्लिश, सबौर ने पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से “प्रोजेक्ट समृद्धि” के अंतर्गत एक भव्य और प्रेरणादायक जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में शिक्षा और छात्रवृत्ति के प्रति जागरूकता फैलाना था, ताकि समाज का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक तंगी या सामाजिक रुकावटों के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इस आयोजन का नेतृत्व विद्यालय के सम्माननीय प्रधानाध्यापक **अनिल कुमार यादव** ने किया। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को रैली के उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया और सबको इस अभियान का सक्रिय हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया।
### रैली की शुरुआत और छात्रों का उत्साह
रैली की शुरुआत विद्यालय परिसर से हुई, जहां छात्र-छात्राओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लिए हुए, उत्साह और आत्मविश्वास से भरकर नारे लगाते हुए गाँव की गलियों में निकले। “हमारा संकल्प – जीरो ड्रॉपआउट पंचायत”, “हर लड़की उच्च शिक्षा प्राप्त करे”, “छात्रवृत्ति का लाभ हर पात्र विद्यार्थी को मिले”, “पढ़े बेटा-बेटी, तभी बनेगा देश सच्चा” जैसे नारे पूरे वातावरण को शिक्षामय बना रहे थे।
छात्रों की यह ऊर्जा देखकर गाँव के लोग भी रुककर रैली को देखने और उसकी बातें सुनने लगे। कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित होते नजर आए।
### ग्रामीण समुदाय से संवाद
रैली के दौरान शिक्षकों और छात्रों ने ग्रामीणों से संवाद भी किया। उन्होंने बताया कि सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा छात्रों के लिए कई प्रकार की छात्रवृत्तियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनका लाभ हर योग्य छात्र को मिल सकता है। जरूरत है केवल जानकारी और सही मार्गदर्शन की।
छात्रों ने ग्रामीणों को बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए सरकार छात्रवृत्ति, पोशाक राशि, साइकिल योजना और कई अन्य योजनाएँ चला रही है, जिनसे उनकी पढ़ाई में मदद मिल सकती है।
### प्रधानाध्यापक का प्रेरणादायी संबोधन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक **अनिल कुमार यादव** ने रैली के समापन पर सभी को संबोधित करते हुए कहा,
> “**शिक्षा ही समाज को आगे ले जाने का माध्यम है। एक शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव रख सकता है।**”
उन्होंने कहा कि विद्यालय का यह संकल्प है कि कोई भी बच्चा केवल आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी बताया कि यदि हम छात्रवृत्ति जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ बच्चों तक पहुँचा सकें, तो हम सच्चे अर्थों में शिक्षा को सबके लिए सुलभ बना सकते हैं।
प्रधानाध्यापक जी ने एक विशेष अपील अभिभावकों से की:
> “**अपने बच्चों को, विशेषकर बेटियों को, नियमित रूप से स्कूल भेजें। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करें। बेटियाँ पढ़ेंगी तभी समाज और देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।**”
### नामांकन अभियान भी चला
इस रैली के साथ-साथ एक विशेष **नामांकन जागरूकता अभियान** भी चलाया गया। शिक्षकों ने गाँव-गाँव जाकर बच्चों के नामांकन के महत्व को बताया। विद्यालय द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि 6 से 18 वर्ष तक का कोई भी बच्चा नामांकन से वंचित न रहे।
गाँव के बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं ने इस पहल की सराहना की और आश्वस्त किया कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने में कोई कोताही नहीं बरतेंगे।
### रैली के प्रभाव और भविष्य की योजनाएँ
यह रैली न केवल छात्रों के लिए एक सीखने और जागरूक होने का माध्यम बनी, बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश भी फैलाया। यह कार्यक्रम ग्रामीण समुदाय और विद्यालय के बीच एक मजबूत पुल के रूप में कार्य कर रहा है।
भविष्य में विद्यालय ऐसे और भी आयोजन करेगा ताकि हर बच्चे तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित की जा सके। पिरामल फाउंडेशन जैसे संगठनों का सहयोग इस मुहिम को और भी सशक्त बना रहा है।
### निष्कर्ष
उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय इंग्लिश, सबौर द्वारा आयोजित यह रैली एक प्रेरक उदाहरण है कि जब विद्यालय, शिक्षक, छात्र और समुदाय एकजुट होकर किसी सामाजिक बदलाव की दिशा में काम करते हैं, तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। शिक्षा और छात्रवृत्ति के लिए उठाया गया यह कदम न केवल एक आयोजन तक सीमित रहा, बल्कि यह एक अभियान की शुरुआत है – उस भविष्य के निर्माण की, जहाँ हर बच्चा शिक्षित हो, जागरूक हो और आत्मनिर्भर बने।
