वर्षों की कड़वाहट के बाद भारत और अजरबैजान के रिश्तों में एक बार फिर सुधार के संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तान के समर्थन को लेकर पैदा हुई दूरी के बावजूद अब दोनों देश रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

3 अप्रैल को अजरबैजान की राजधानी में भारत और अजरबैजान के विदेश मंत्रालयों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस दौरान भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव से मुलाकात की। बैठक में व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और पर्यटन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी।

बैठक में यह भी तय हुआ कि दोनों देशों के संबंधों पर किसी तीसरे देश का प्रभाव नहीं पड़ेगा। अगली बैठक नई दिल्ली में आयोजित करने पर भी सहमति बनी है।

दरअसल, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास आई थी। अजरबैजान को पाकिस्तान का करीबी माना जाता है और वह कई बार मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में बयान देता रहा है। इसके अलावा 2025 में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिससे तनाव और बढ़ गया।

एक और बड़ा कारण था आर्मेनिया को भारत द्वारा हथियारों की आपूर्ति। और के बीच लंबे समय से तनाव रहा है, ऐसे में भारत-आर्मेनिया रक्षा सौदे अजरबैजान को नागवार गुजरे।

हालांकि व्यापारिक रिश्ते हमेशा मजबूत बने रहे। भारत तंबाकू, चाय, कॉफी, रसायन और अन्य उत्पाद अजरबैजान को निर्यात करता है, जबकि अजरबैजान से कच्चा तेल और गैस भारत के लिए अहम आयात रहे हैं।

रणनीतिक रूप से अजरबैजान कैस्पियन सागर के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र है। यहां तेल और गैस के विशाल भंडार हैं, जिससे यह भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम साझेदार बनता है।

मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, खासकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में अजरबैजान के साथ रिश्तों में सुधार दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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