पिछले साल नरमी के बाद इस साल जनवरी से ही खाद्य तेलों की कीमतों में उछाल जारी है। फरवरी में ब्रांडेड सनफ्लॉवर, वनस्पति, सरसों और मूंगफली तेल की बिक्री कीमतों में मासिक आधार पर नौ फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

रिटेल कीमतों पर नजर रखने वाले मंच बिजोम के डाटा के अनुसार, पिछले महीने पैकेटबंद सनफ्लॉवर तेल की कीमतों में जनवरी के मुकाबले चार फीसदी की बढ़ोतरी रही है। वहीं, समान अवधि में सरसों का तेल 8.7 फीसदी महंगा हुआ है। हालांकि, सोयाबीन तेल की कीमतों में 0.4 फीसदी की मामूली गिरावट आई है।
डाटा के अनुसार, फरवरी में वनस्पति तेल की कीमतों में 2.7 फीसदी और मूंगफली तेल की कीमतों में एक फीसदी की तेजी रही है।

भारतीय परिवारों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले पाम तेल की कीमतों में फरवरी में 12.9 फीसदी की बड़ी गिरावट रही है। हालांकि, एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले इसकी कीमत अभी भी 22.9 फीसदी ज्यादा है। बिजोम पूरे भारत में 75 लाख से ज्यादा खुदरा दुकानों की खुदरा कीमतों पर नजर रखता है।

बिजोम के डाटा के अनुसार, देश में खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले साल सितंबर और दिसंबर तिमाही में नरमी रही है। डाटा के अनुसार, जनवरी 2022 से खाद्य तेलों की कीमतों में फिर से तेजी शुरू हुई है। हालांकि, जनवरी में खाद्य तेलों की कीमत दो साल के उच्च स्तर से 10 से 30 फीसदी तक कम थीं।

रूस-यूक्रेन युद्ध का खाद्य तेलों समेत प्रमुख कमोडिटी की कीमतों पर लंबे समय तक असर रहेगा। इसका कारण यह है कि यूक्रेन सनफ्लॉवर तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। बिजोम के मुख्य विपणन अधिकारी अक्षय डिसूजा का कहना है कि सरकारी की ओर से किए गए उपायों के कारण पिछले दो वर्षों से खाद्य तेलों की कीमतों में स्थिरता रही है, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अब अधिकांश खाद्य तेलों में परिदृश्य बदल चुका है।

बीएनपी परिबास की ओर से 17 मार्च को जारी रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य तेलों की कीमत में वार्षिक आधार पर 15 से 20 फीसदी की तेजी आ गई है। अधिकांश खाद्य तेलों की कीमत प्री-कोविड स्तर से ऊंची बनी हुई हैं। फरवरी 2020 के मुकाबले सनफ्लॉवर तेल की कीमत 50 फीसदी ज्यादा है। वहीं, वनस्पति तेल 58 फीसदी और सोयाबीन तेल 20 फीसदी महंगा हो गया है।

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