बिहार के सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड में विकास के नाम पर चल रही खानापूरी की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। पुरीख से बरुवारी रेलवे स्टेशन तक बनने वाली 5 किलोमीटर लंबी सड़क का शिलान्यास जून 2025 में बड़े धूमधाम से हुआ था, लेकिन महीनों बाद भी सड़क का काम कागजों पर ही दौड़ रहा है। धरातल पर अब तक कुछ नहीं हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि संवेदक चंद्रिका साह की लापरवाही और मनमानी के कारण सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि पैदल चलना भी अब मुश्किल हो गया है। बरसात के दिनों में कीचड़ और गंदगी की समस्या और बढ़ जाती है, जिससे स्टेशन जाने में घंटों का समय लग जाता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब शिलान्यास हुआ था, तो उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और उनकी यात्रा आसान हो जाएगी, लेकिन अब महीनों बाद भी कोई प्रगति नहीं दिख रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक के खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अधिकारियों ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन इन लापरवाह संवेदकों पर कार्रवाई करेगा या फिर पुरीख के ग्रामीणों को बदहाल रास्तों पर चलने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

यह सड़क न केवल सत्तरकटैया प्रखंड के लोगों के लिए एक बड़ी जरूरत है, बल्कि क्षेत्रीय विकास का एक अहम हिस्सा भी है। प्रशासन और संवेदक को अब तत्काल इस पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके और सड़क का काम समय पर पूरा हो सके।

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