पटना हाईकोर्ट ने राजधानी समेत पूरे बिहार में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने पर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए स्थिति को “खतरनाक” बताया। जस्टिस राजीव रॉय ने सुरेंद्र प्रसाद की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बोर्ड अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में पूरी तरह विफल रहा है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए ‘रन फॉर पॉल्यूशन’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही डीजे और लाउडस्पीकर पर कार्रवाई में ढिलाई को लेकर भी नाराजगी जताई। बोर्ड की ओर से पेश रिपोर्ट में मैरिज हॉल को नोटिस जारी करने और निर्माण सामग्री ढोने में ‘ग्रीन नेट’ के इस्तेमाल की बात कही गई, लेकिन न्यायमित्र ने स्थानीय निकायों को भेजे गए पत्रों का कोई रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही।
हाईकोर्ट ने कदमकुआं, पीरबहोर, आलमगंज, रूपसपुर, गांधी मैदान और बुद्ध कॉलोनी थानों के प्रभारियों को भी उनकी निष्क्रियता के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने इन थानों की रिपोर्ट को असंतोषजनक बताते हुए 19 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान राजीव नगर और छपरा सदर क्षेत्रों में भी ध्वनि प्रदूषण के गंभीर उल्लंघन की शिकायतें सामने आईं, जिस पर संबंधित थानों को विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि बारात या जुलूस को रोके बिना, नियम तोड़ने वालों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाए।
ऑटो और ई-रिक्शा में तेज आवाज में गाने बजाने का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने इस पर पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए संबंधित कानूनों के पालन की जानकारी मांगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग प्रतिबंधित है और उल्लंघन करने पर पुलिस को जब्ती और कार्रवाई का अधिकार है।
