दुनियाभर में कई खाने-पीने की चीजें हैं. फल, सब्जियां, मांस, अंडा, चावल जैसी तमाम चीजें लोग अपने भोजन में शामिल करते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर इस धरती पर खाने की सबसे शुद्ध चीज क्या है? कुछ लोगों को लगता होगा कि फल और सब्जियां सबसे शुद्ध हैं. लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. अच्छी बात ये है कि भारत में दुनिया की सबसे शुद्ध खाने की चीज का इस्तेमाल लगभग हर घर में किया जाता है. आइए इसके बारे में बताते हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, धरती पर मौजूद सबसे शुद्ध आहार ‘घी’ है. कुछ लोग इसे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानते हैं. लेकिन हजारों साल से घी भोजन का अहम हिस्सा रहा है. लेकिन कुछ दशकों से ऐसा माने जाने लगा कि घी का सैचुरेटेड फैट यानी संतृप्त वसा हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है. लेकिन अब जैसे-जैसे सैचुरेटेड फैट को लेकर लोगों की सोच बदली, भारतीयों की थाली में घी वापस अपनी जगह बना रहा है.

वैसे तो घी को वापस लोगों ने आहार में शामिल करना शुरू कर दिया था, लेकिन कोरोना महामारी के वक्त इसका महत्व ज्यादा बढ़ गया, जब लोग अपने खान-पान को लेकर जागरुक होना शुरू हो गए. ये ‘स्लो फूड’ अभियान के ट्रेंड का भी एक हिस्सा है. इस अभियान के तहत घी का उत्पादन स्थानीय स्तर यहां तक कि घर पर भी किया जा सकता है और संस्कृति से इसका अटूट संबंध तो है ही.

भारत में लगातार घी के उत्पादन में वृद्धि हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद घी की मांग में 25 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है. घी स्वास्थ्य से तो जुड़ा ही है साथ ही इसका इस्तेमाल पूजा पाठ में भी किया जाता है. यानी घी लोगों की आस्था से भी जुड़ा है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, वैदिक काल के देवता प्रजापति दक्ष ने अपने दोनों हाथों को रगड़ कर पहली बार घी बनाया था. इसी घी को अग्नि में डालकर उन्होंने अपने बच्चों का सृजन किया था.

इसके अलावा भारतीय संस्कृति से भी घी का गहरा नाता है. हिंदू शादी विवाह से लेकर हर तरह के शुभ कार्यों में हवन की अग्नि में घी का समर्पण किया जाता है. घी को शुभ माना जाता है. इसके अलावा आयुर्वेद में भी घी को रामबाण माना गया है. घी के पौष्टिक गुणों की वजह से इसे ज्यादातर घरों में इस्तेमाल किया जाता है. आपने देखा भी होगा कि घर से दूर शहर में पढ़ाई या नौकरी कर रहे लोगों के लिए घर में बना घी भेजा जाता है.

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