सहरसा सदर अस्पताल, जहां लोग इलाज और राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, अब सुरक्षा को लेकर बड़े सवालों के घेरे में है। लाख दावों और इंतजामों के बावजूद अस्पताल परिसर में चोरी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला आज का है, जब सदर अस्पताल में तैनात लैब टेक्नीशियन अरुण कुमार की बाइक दिनदहाड़े अस्पताल परिसर से चोरी हो गई। यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
पीड़ित अरुण कुमार ने बताया कि वह रोज की तरह सुबह ड्यूटी पर आए थे और अपनी बाइक अस्पताल परिसर के अंदर सुरक्षित स्थान पर खड़ी की थी। दोपहर करीब 2 बजे वह किसी काम से बाइक की डिक्की से जरूरी कागजात निकालकर वापस अंदर चले गए। लेकिन महज दस मिनट बाद, लगभग 2 बजकर 10 मिनट पर जब वह बाहर आए, तो उनकी बाइक वहां से गायब थी। इतने कम समय में चोरी होना यह दर्शाता है कि चोरों के हौसले कितने बुलंद हैं।
घटना के तुरंत बाद अरुण कुमार ने अस्पताल मैनेजर से मिलकर सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की, लेकिन यहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। मैनेजर द्वारा यह कहकर मामला टाल दिया गया कि संबंधित स्टाफ को बुलाया जा रहा है और फुटेज बाद में निकाली जाएगी। सवाल यह उठता है कि जब परिसर में कैमरे लगे हैं, तो तत्काल फुटेज निकालने में इतनी देरी क्यों? क्या यह लापरवाही नहीं, बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
इसके बाद पीड़ित सदर थाना पहुंचे, जहां उनसे लिखित आवेदन लिया गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जांच के लिए उन्हें अगले दिन आने को कहा गया। क्या चोरी जैसी घटना में त्वरित कार्रवाई की यही प्रक्रिया है? क्या इससे अपराधियों का मनोबल और नहीं बढ़ेगा?
गौरतलब है कि सुरक्षा के नाम पर सहरसा सदर अस्पताल के दो गेट पहले से बंद कर दिए गए हैं और परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इससे साफ है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य कर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम मरीज और उनके परिजनों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? क्या अरुण कुमार को उनकी चोरी हुई बाइक वापस मिल पाएगी या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
