राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर उच्च सदन में मौका मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। यह नामांकन पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायरमेंट के बाद खाली हुई सीट को भरने के लिए किया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में इसकी पुष्टि की गई है।

संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वे साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 12 सदस्यों को राज्यसभा के लिए नामित कर सकती हैं। हरिवंश नारायण सिंह का चयन इसी प्रावधान के तहत किया गया है।

69 वर्षीय हरिवंश पहले ही बिहार से राज्यसभा के सदस्य के रूप में दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। वे पेशे से वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी एक साफ-सुथरी छवि मानी जाती है। साल 2014 में वे पहली बार जनता दल (यू) की ओर से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।

हरिवंश का संसदीय करियर भी काफी उल्लेखनीय रहा है। 9 अगस्त 2018 को वे पहली बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे। इसके बाद 14 सितंबर 2020 को उन्होंने लगातार दूसरी बार इस पद पर जीत हासिल की। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही को संतुलित और गरिमापूर्ण तरीके से संचालित करने के लिए पहचान बनाई।

अब तीसरी बार राज्यसभा में उनकी एंट्री के बाद एक बार फिर से यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें उपसभापति पद की जिम्मेदारी दोबारा सौंपी जाएगी। हालांकि इस पर अंतिम फैसला सदन के सदस्यों द्वारा ही लिया जाएगा।

हरिवंश की वापसी को राजनीतिक और संसदीय हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुभव और संतुलित नेतृत्व से राज्यसभा की कार्यवाही को फिर से मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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