सहरसा जिले में कला, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब कला संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में संत रविदास महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में समानता व भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करना है।
महोत्सव की शुरुआत सदर अस्पताल मोड़ चौक स्थित रविदास मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई। जिलाधिकारी दीपेश कुमार सहित अन्य वरीय पदाधिकारियों ने संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके उपरांत मंदिर परिसर में अपराह्न 3 बजे तक संत रविदास रचित भजनों, लोकगीत गायन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आमजन शामिल हुए।
शाम 4 बजे से प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य उद्घाटन किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से संत रविदास के विचारों को मंच पर जीवंत करेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने कहा कि संत रविदास केवल एक महान संत ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर समानता, मानवता और कर्म की महत्ता पर बल दिया। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने वाले हैं और उन पर चलना हम सभी का दायित्व है।
जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी ने बताया कि जिला पदाधिकारी के मार्गदर्शन में विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े कलाकारों को मंच और पहचान मिल सके। महोत्सव के दौरान विलुप्तप्राय रसन चौकी वादन कला का विशेष मंचन किया जाएगा, जिससे इस पारंपरिक कला को नया जीवन मिलेगा। इसके साथ ही संत रविदास के विचारों पर आधारित नाटक “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का मंचन भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।
महोत्सव में लोकसंगीत, शास्त्रीय संगीत, रविदास भजन, सूफी और ग़ज़ल गायन की प्रभावशाली प्रस्तुतियां होंगी, जो दर्शकों को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध अनुभव प्रदान करेंगी। कुल मिलाकर संत रविदास महोत्सव सहरसा में न केवल कला और संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को मजबूत करने का एक सार्थक प्रयास भी है।
