बिहार के नालंदा में भगवान महावीर की 2625वीं जयंती के अवसर पर मंगलवार, 31 मार्च को कुंडलपुर महोत्सव पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भगवान महावीर की जन्मस्थली कुंडलपुर में सुबह से ही धार्मिक आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां देश-विदेश से आए जैन श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
महावीर जयंती के उपलक्ष्य में सुबह करीब 7 बजे कुंडलपुर मंदिर से भव्य रथ यात्रा निकाली गई। इस रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु जयकारों के साथ झूमते-गाते आगे बढ़ते रहे। रथ यात्रा कुंडलपुर मंदिर से शुरू होकर नालंदा खंडहर के समीप तक पहुंची और फिर वापस मंदिर परिसर लौटी।
रथ यात्रा के समापन के बाद श्रद्धालु भगवान महावीर की पूजा-अर्चना में जुट गए। इस अवसर पर बिहार सरकार द्वारा दो दिवसीय ‘कुंडलपुर महोत्सव’ का आयोजन किया गया है, जिसे राजकीय महोत्सव का दर्जा प्राप्त है। आयोजन को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं ने संतोष जताया और सरकार की सराहना की।
महोत्सव की शुरुआत भगवान आदिनाथ के अभिषेक और शांतिधारा से होती है। इसके बाद ‘सप्तरंगी महामस्तकाभिषेक’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूध, दही, घी और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया जाता है। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहद दिव्य और भावुक कर देने वाला होता है।
शाम के समय महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें देश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधते हैं।
दो दिवसीय इस महोत्सव में दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी जैन अनुयायी शामिल हो रहे हैं। कुंडलपुर महोत्सव न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान भी दिला रहा है।
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