बिहार में आंचलिक उद्यमों और राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल के कारण भूमि से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए हैं। 9 मार्च से चल रही इस हड़ताल का असर राज्य के 22 दिनों में साफ दिख रहा है। पैमाइश-खारिज, परिमार्जन और जमीन मापन जैसे जरूरी काम में लगे लोग, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त रुख और वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है। चित्रलिपि सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि हड़ताल के बावजूद जनता को किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने एनबीएल स्तर पर कई कदम उठाए हैं, ताकि जमीन से जुड़े कार्यों को सुचारु रूप से जारी किया जा सके।

सरकार के निर्णय के अनुसार, ब्लॉकचेन के कार्य की ज़िम्मेदारी ब्लॉक विकास विचारधारा को नामांकित किया गया है। वहीं राजस्व कर्मचारियों के देनदारी पंचायत सचिवों के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सभी वास्तुशिल्प कर्मचारियों की उपस्थिति रिपोर्ट भी खाली कर दी गई है और जहां-जहां काम प्रभावित हुआ है, वहां-वहां की लगातार समीक्षा की जा रही है।

फोटोग्राफर विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताली कर्मचारियों से अपील करते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द काम पर लौटें, ताकि बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन व्यवधान के कार्यों में बाधा नहीं डाली जाएगी।

साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्टेप्स जैसे प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

वरिआ, विश्वैक मुख्य रूप से डीसीएलआर यानी उप समाहर्ता लैंड रिफॉर्मेशन की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही राजस्व कर्मचारियों की मांगें भी कई अन्य सहायक विश्वविद्यालयों से जुड़ी हुई बताई जा रही हैं। अंतरिम हड़ताल जारी है और सरकारी कर्मचारियों के बीच किसी भी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है।

सरकार का कहना है कि मार्च महीने में भूमि पंजीकरण और राजस्व से जुड़े श्रमिकों की शिकायतें बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए प्रशासन का कर्तव्य है कि जनसेवा में किसी भी तरह की बाधा न आए और सभी आवश्यक कार्य समय पर पूरे किए जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *