सहरसा जिले में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 19 दिसंबर 2025 तक जिले में कुल 8 लाख 34 हजार 861 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद योजना का वास्तविक लाभ सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों तक अधिक सीमित होता दिख रहा है।
नवंबर 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में केवल करीब 3500 मरीजों को ही आयुष्मान योजना के तहत इलाज की सुविधा मिल सकी, जबकि जिले के निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में 13 हजार 967 मरीजों का निशुल्क इलाज किया गया। यह आंकड़ा सरकारी संस्थानों के मुकाबले लगभग चार गुना अधिक है, जो जिले की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है।
सहरसा जिले में आयुष्मान योजना के अंतर्गत कई निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जहां बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की भूमिका को लेकर सबसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि सदर अस्पताल में आयुष्मान मद से खर्च की गई राशि को लेकर न तो स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जा रही है और न ही रोगी कल्याण समिति से आवश्यक स्वीकृति ली गई।
सूत्रों का कहना है कि नियमों के विपरीत बिना टेंडर प्रक्रिया और बिना सक्षम अनुमति के आयुष्मान योजना की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। यही नहीं, योजना के नियमों के अनुसार डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों को मिलने वाली 30 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि भी अब तक उन्हें नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि एक भी स्वास्थ्य कर्मी को इस मद से कोई भुगतान नहीं किया गया, जिससे डॉक्टरों और कर्मचारियों में नाराजगी है।
इन आरोपों के सामने आने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सदर अस्पताल में आयुष्मान योजना के संचालन में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी या नहीं। आम लोगों की उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर आयुष्मान योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद मरीजों तक पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से पहुंचाना सुनिश्चित करेगा।
